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लविश चौधरी उर्फ नवाब अली: ₹3600 करोड़ का Botbro-TLC MLM घोटाला पूरी कहानी

 

₹3600 करोड़ का घोटाला: कौन है लविश चौधरी उर्फ़ नवाब अली, जिसने हज़ारों लोगों को बर्बाद कर दिया



दोस्तों, फ्रॉड अलर्ट सीरीज़ में आज बात करते हैं एक ऐसे घोटाले की, जिसे शायद भारत में अब तक का सबसे बड़ा MLM स्कैम कहा जा सकता है। रकम कितनी है, अंदाज़ा लगाइए — करीब ₹3600 करोड़। इतना पैसा, इतने सारे लोगों की मेहनत की कमाई, और बीच में एक शख्स जिसका नाम है लविश चौधरी, जिसे लोग नवाब अली के नाम से भी जानते हैं।

आज की पोस्ट में पूरी कहानी समझते हैं — शुरुआत से लेकर अभी तक के लेटेस्ट अपडेट तक।

लविश चौधरी कौन है?

गाज़ियाबाद के पसौंदा गांव का रहने वाला ये शख्स, जिसका मुज़फ्फरनगर से भी नाता है, आजकल दुबई में बैठा हुआ है। शाहजहां, अबू धाबी में इसका ठिकाना बताया जाता है, जहां वो "यूपी नवाब्स" के नाम से जाना जाता है और अबू धाबी की टी10 क्रिकेट लीग में भी इसका नाम जुड़ा हुआ है। खुद को ये AI-based फॉरेक्स ट्रेडिंग का जानकार बताता था — यानी दावा ये कि उसके पास एक ऐसा रोबोट है जो अपने आप ट्रेडिंग करता है और हमेशा मुनाफ़ा ही देता है।

यहीं से समझ लीजिए कि कहानी में गड़बड़ कहां से शुरू होती है। दुनिया में कोई ऐसा सिस्टम नहीं है — इंसान हो या बॉट — जो ट्रेडिंग करे और हमेशा प्रॉफिट ही दे। नुकसान कभी न कभी होता ही है। जो कोई भी ये दावा करे कि उसका रिटर्न गारंटीड है, वहीं से सावधान हो जाना चाहिए।

स्कीम कैसे चलाई गई

शुरुआत हुई Botbro नाम की कंपनी से। दावा था कि हर महीने 5 से 7% रिटर्न मिलेगा, बस जुड़ने के लिए कम से कम ₹18,000 का निवेश करना होगा। इसमें से एक हिस्सा TLC कॉइन के रूप में दिया जाता था — यानी अगर आपने $100 लगाए तो आपको 40 कॉइन मिलेंगे, और भरोसा दिलाया जाता था कि आगे चलकर ये कॉइन लॉन्च होगा और आप मालामाल हो जाएंगे।

जैसे ही सरकार की नज़र पड़ी और Botbro पर बैन लगा, नाम बदलकर QFX हो गया। फिर टीएलसी कॉइन का नाम बदलकर ट्राई लाइनर कॉइन कर दिया गया। फिर छापा पड़ा तो नाम बदलकर Bot Alpha हो गया। और जब वहां भी FIR दर्ज हुईं, तो अगला अवतार आया — MineCryptos.com, जिसमें अब कहानी बदलकर बिटकॉइन माइनिंग की हो गई थी।

यानी पैटर्न साफ है — जैसे ही जांच एजेंसियों की नज़र पड़ती, कंपनी का नाम और डोमेन बदल दिया जाता, ताकि थोड़ी देर के लिए भरोसा फिर से बनाया जा सके।

इन्वेस्टर्स को लुभाने के लिए लग्ज़री होटलों और फार्महाउस में इवेंट्स होते थे। दुबई बुलाकर सम्मानित किया जाता था, जिसके लिए करीब ₹6000 की कोई फीस ली जाती थी। इन इवेंट्स का नाम था "ब्लैक पैंथर" — 1.0, 2.0, यहां तक कि 6.0 वर्ज़न तक हो चुके हैं। इनकी क्लिप्स आज भी इंटरनेट पर मिल जाएंगी।

ED की कार्रवाई — टाइमलाइन से समझिए

फरवरी 2025 में ED ने दिल्ली, नोएडा, रोहतक और शामली में छापेमारी की और सीधे ₹170 करोड़ फ्रीज़ कर दिए। इसके बाद जांच में सामने आईं 185 शेल कंपनियां — छोटी-छोटी कंपनियां जिनके ज़रिए लोगों से पैसा लेकर USDT जैसी क्रिप्टोकरेंसी खरीदी जाती और फिर वो पैसा दुबई भेज दिया जाता। इन कंपनियों से कुल मिलाकर ₹391 करोड़ फ्रीज़ किए गए।

सितंबर 2025 में मध्य प्रदेश STF और ED की संयुक्त कार्रवाई में एजेंट हरिंद्र पाल सिंह और नवाब हसन गिरफ्तार हुए। 2026 में शामली में छापेमारी हुई, जिसमें ₹94 लाख कैश बरामद हुआ और मेरठ, सहारनपुर, बागपत में फैले 17 एजेंट्स के नेटवर्क को गिरफ्तार किया गया।

MP STF के मुताबिक अब तक 11 से ज़्यादा जुड़े लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, और घोटाले की रकम का आंकड़ा अब ₹3200 करोड़ तक पहुंच चुका है — जो आगे और बढ़ भी सकता है क्योंकि जांच अभी जारी है।

इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस और डिपोर्टेशन प्रोसेस

लविश चौधरी को वापस भारत लाने के लिए क्या प्रोसेस चल रहा है, ये भी समझना ज़रूरी है।

सबसे पहले इंटरपोल ने ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया, ताकि उसकी लोकेशन और गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। इसके बाद MP STF ने ठोस सबूत जुटाए — इस पूरे केस में MP STF का रोल सबसे अहम रहा है। फिर इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया, जो 190 से ज़्यादा देशों में मान्य है। मतलब, अब वो दुनिया में कहीं भी छिपा हो, पकड़े जाने पर भारत को सौंपा जा सकता है।

इंदौर की स्पेशल कोर्ट में एक्सट्राडिशन एप्लिकेशन फाइल हो चुकी है, और केस की फाइल गृह मंत्रालय होते हुए विदेश मंत्रालय तक पहुंच चुकी है। अब UAE के साथ बातचीत होनी है। दिक्कत सिर्फ ये है कि पूरी केस फाइल हिंदी में तैयार की गई है, जिसे UAE अधिकारियों को सौंपने से पहले अंग्रेज़ी में ट्रांसलेट करना होगा — इसी वजह से अनुमानित 3 से 4 महीने का और वक्त लग सकता है।

जुलाई 2026 का लेटेस्ट अपडेट

अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, मुज़फ्फरनगर के खालापार थाने में लविश चौधरी के खिलाफ नया मुकदमा दर्ज हुआ है — 15 लोगों से ₹60 लाख की ठगी का आरोप, वो भी 5% मासिक मुनाफ़े का लालच देकर। ये केस ₹210 करोड़ के बड़े गैंग से जुड़ा बताया जा रहा है।

इसके अलावा जुलाई में शामली से ₹94 लाख कैश ज़ब्त हुआ, 17 एजेंट्स का नेटवर्क तोड़ा गया, और लविश चौधरी के खिलाफ लुक आउट नोटिस भी जारी किया जा चुका है।

सीखने वाली बात

निवेश से पहले जांच करना ज़रूरी है, बाद में पछताने से कोई फायदा नहीं। कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो हर बार दोहराए जाते हैं — गारंटीड रिटर्न का दावा, MLM जैसा स्ट्रक्चर जहां नए लोगों को जोड़ने पर कमीशन मिले, कंपनी के असली मालिकों का पता न होना, और किसी भी रेगुलेटरी बॉडी से लाइसेंस न होना। जहां भी ये चार चीज़ें एक साथ दिखें, वहां रुक जाना ही समझदारी है।

अगर आपके पास भी कोई ऐसी स्कीम या कंपनी है जिसमें आपको निवेश के लिए कहा जा रहा है और आप कन्फ्यूज़ हैं, तो कमेंट में लिखिए या टेलीग्राम पर मैसेज कीजिए — पूरी जानकारी के साथ अपनी राय ज़रूर दूंगा।

अगली अपडेट के साथ फिर मिलते हैं।




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